अभी कुछ ही दिन पहले की बात है की लोग ढंड से परेशान थे और सबकी जुबान पर एक ही बात थी उफ़ ये ठण्ड मार ही डालेगी, मगर अब मौसम बदल गया है, आज कल दिल्ली के मौसम का मिजाज अलग हो गया है। रात मैं ठण्ड और दिन मैं गर्मी। मुझे तो ये लग रहा है की बहुत ही जल्द दिल्ली वाले कहने लगेंगे की उफ़ ये गर्मी।
और गर्मी आये भी क्यों नहीं जब दिल्ली और दिल्ली के आसपास इतने सारे पेड़ विकास के नाम पर काटे जायेंगे तो क्या होगा। खेल के चक्कर मैं दिल्ली के पर्यावरण का पूरा का पूरा खेल ही बिगड़ गया है।
Tuesday, February 2, 2010
Thursday, December 3, 2009
एक जंगल ये भी है
एक जंगल ये भी जहाँ जानवरों के साथ साथ इन्सान भी रहते हैं, जानवरों के बीच में कोई भी खतरनाक जानवर नही है मगर इंसानों के बीच में हजारो की गिनती में खतरनाक जानवर मिलेंगे। सबसे ज्यादा इंसानी जानवर सरकारी मोहल्ले में पाए जाते हैं , जिनको अक्कल नाम की बिल्कुल भी कोई वस्तु उनके पास नही है। अगर अक्कल नाम की कोई चीज उनके पास होती तो शायद प्रकृति को बचाने में उसका योगदान जरुर करते।
बात दिल्ली की है, दिलशाद गार्डेन से कश्मीरी गेट तक, अक्षरधाम से गाजीपुर तक , गाजीपुर से दिलशाद गार्डेन तक, फ्लाई ओवर बनाने के चक्कर में ८० प्रतिशत तक पेड़ो को काट दिया गया है, अधिकारी चाहते और दिमाग से काम लेते तो तो शायद बड़ी मात्रा में पेड़ो को बचाया जा सकता था। आप लोग ख़ुद भी देख सकते हैं ऐसी -ऐसी जगह से पेड़ो को काटा गया हैं , जो निर्माण स्थल से काफी दूर हैं उन्हें भी रास्ते से हटा दिया गया है। दिलशाद गार्डेन से ले कर के गाज़ियाबाद के मोहन नगर के बीच में सैकड़ो की संख्या में बड़े और पुराने पेड़ो को काट दिया गया है,
आप में से कई लोग प्रतिदिन इन रास्तो से आते जातें होंगे , मगर क्या आप ने कभी सोचा की ये क्या हो रहा है।
बात दिल्ली की है, दिलशाद गार्डेन से कश्मीरी गेट तक, अक्षरधाम से गाजीपुर तक , गाजीपुर से दिलशाद गार्डेन तक, फ्लाई ओवर बनाने के चक्कर में ८० प्रतिशत तक पेड़ो को काट दिया गया है, अधिकारी चाहते और दिमाग से काम लेते तो तो शायद बड़ी मात्रा में पेड़ो को बचाया जा सकता था। आप लोग ख़ुद भी देख सकते हैं ऐसी -ऐसी जगह से पेड़ो को काटा गया हैं , जो निर्माण स्थल से काफी दूर हैं उन्हें भी रास्ते से हटा दिया गया है। दिलशाद गार्डेन से ले कर के गाज़ियाबाद के मोहन नगर के बीच में सैकड़ो की संख्या में बड़े और पुराने पेड़ो को काट दिया गया है,
आप में से कई लोग प्रतिदिन इन रास्तो से आते जातें होंगे , मगर क्या आप ने कभी सोचा की ये क्या हो रहा है।
Wednesday, July 1, 2009
आया सावन झूम के -
अभी सावन आया नही है , मगर आने वाला है अभी तो गर्मी का प्रकोप और जारी रहेगा । लेकिन बादल भी आने को बेताब हैं फिलहाल तो वो उन्हें सिर्फ़ इतनी परमीसन मिली है की वो अपने घर की
Wednesday, April 29, 2009
बन्दर भी आइसक्रीम खाता है.

आज कल की गर्मी का एहशाश किसे नही है, हम इंसानों के द्वारा फैलाये गए प्रदुषण हम ख़ुद तो झेल रहें हैं साथ मैं औरो को भी परेशां कर रहे हैं, अब इस बन्दर बचारे को ही देख लीजिये वैसे तो ये श्रीमान चिडियाघर के अन्दर पाए जाते हैं, जहाँ पर चिडियाघर का प्रसाशन कहता है की सभी जानवरों को गर्मी से बचने के लिए जरुरी इंतजाम किया गया है, लेकिन सारे इंतजामों को छोड़कर के ये श्रीमान एक छोटे से बच्चे की आइसक्रीम छीन कर के ख़ुद पेड़ पर चढ़ कर के कैसे खा रहे हैं ।
इस गर्मी से बचने के लिए हमें आइसक्रीम, एयर कन्डीशन, कूलर आदि का सहारा छोड़ कर के प्रकृति के सहारे को पकड़ना पड़ेगा।
Monday, April 27, 2009
जय हो मां गंगा
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