Thursday, December 3, 2009

एक जंगल ये भी है

एक जंगल ये भी जहाँ जानवरों के साथ साथ इन्सान भी रहते हैं, जानवरों के बीच में कोई भी खतरनाक जानवर नही है मगर इंसानों के बीच में हजारो की गिनती में खतरनाक जानवर मिलेंगेसबसे ज्यादा इंसानी जानवर सरकारी मोहल्ले में पाए जाते हैं , जिनको अक्कल नाम की बिल्कुल भी कोई वस्तु उनके पास नही हैअगर अक्कल नाम की कोई चीज उनके पास होती तो शायद प्रकृति को बचाने में उसका योगदान जरुर करते

बात दिल्ली की है, दिलशाद गार्डेन से कश्मीरी गेट तक, अक्षरधाम से गाजीपुर तक , गाजीपुर से दिलशाद गार्डेन तक, फ्लाई ओवर बनाने के चक्कर में ८० प्रतिशत तक पेड़ो को काट दिया गया है, अधिकारी चाहते और दिमाग से काम लेते तो तो शायद बड़ी मात्रा में पेड़ो को बचाया जा सकता थाआप लोग ख़ुद भी देख सकते हैं ऐसी -ऐसी जगह से पेड़ो को काटा गया हैं , जो निर्माण स्थल से काफी दूर हैं उन्हें भी रास्ते से हटा दिया गया हैदिलशाद गार्डेन से ले कर के गाज़ियाबाद के मोहन नगर के बीच में सैकड़ो की संख्या में बड़े और पुराने पेड़ो को काट दिया गया है,

आप में से कई लोग प्रतिदिन इन रास्तो से आते जातें होंगे , मगर क्या आप ने कभी सोचा की ये क्या हो रहा है

8 comments:

  1. उनके पास सब से अधिक अकल है तभी तो विकास के नाम पर अपनी जेब भर रहे हैं और प्रकृ्ति को भी नहीं बख्श रहे। इन्दान के यही बुद्धि तो उसके विनाश का कारण बन रही है । बहुत सही सवाल उठाया आपने शुभकामनायें।ाउर आपका ब्लागजगत मे स्वागत है।

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  2. अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

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  3. सही मुद्दे उठायें हैं आपने.

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  5. वाह जी सही मुद्दे को उठाया है आपने । स्वागत है ।

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